*जिलाधिकारी कुशीनगर आम जनमानस के लिए फरिश्ता ! बाकी आधा सच आधा अफसाना*
कुशीनगर से वरिष्ठ पत्रकार गौरी शंकर जी की रिपोर्ट
जिलाधिकारी कुशीनगर महेंद्र सिंह तंवर शासन के मंशा के अनुरुप कार्यो को धरातल पर उतारने की कोशिश, इसके अलावा अपने विवेक से इस जनपद को अलग रुप स्वरुप देने के लिए पुरा-पुरा प्रयास कर रहे है l
जिलाधिकारी श्री तंवर अपने सकारात्मक कार्यो से जाने जा रहे है, हमने भी जब जिलाधिकारी का मन मस्तिष्क को परखा तो लगा जनपद को एक अलग सुन्दर स्वरुप देना चाहते है, अन्य जनपदों से हटकर कुशीनगर जनपद को एक अलग पहचान बनाने मे कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है l
यह अलग बात है कि प्रभु श्रीराम की मर्यादा को रखने के लिए बासी धाम को नारायणी से जोडने एवं इस धाम को उत्तर प्रदेश के मुखिया का ध्यान आकर्षित कराने मे लगे रहे परन्तु कामयाबी नहीं मिल पायी जैसा हमने महसूस किया कारण जो भी हो l
इसके आलावा पडरौना चीनी फैक्ट्री नही चलने की स्थिति में है फिर भी जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर पडरौना नगर के व्यावसाईयों और आस पास के किसानों को विश्वास दिलाने मे लगे रहे l एक बार स्वयं चीनी फैक्ट्री के अन्दर जाकर पहल भी किया, लोगों को विश्वास भी दिलवाया कि अब वह दिन दूर नही जब हर व्यवसायी एवं हर किसान खुशहाल होगा और हर हाथों में झोला होगा और झोले में रुपया पैसा होगा l
जब जिलाधिकारी कुशीनगर श्री तंवर चीनी फैक्ट्री चलवाने का प्रयास कर रहे थे उस समय आई कैन न्यूज सम्पादक गौरी शंकर गुप्त को लगा— *कुछ सच कुछ अफसाना* तो नही, मैंने जीरो ग्राउंड पर हकीकत से रुबरु होने के लिए कलम कापी लेकर उतरा तो पता चला चीनी फैक्ट्री चलने की स्थिति मे है परन्तु चल नही पायेगा,किसानों से मिला, और फैक्ट्री के अन्दर तक टटोला हमे आधा सच आधा अफसाना दिखा, फिर भी कोई लाख चाहे फैक्ट्री चलवाने का, कोई कितना भी प्रयास कर ले, परन्तु पडरौना चीनी फैक्ट्री किसी भी हालत मे नही चल सकती, क्योंकि फैक्ट्री चलने की स्थिति मे नही है कारण एक नही कई कारण है —?
हां जिलाधिकारी कुशीनगर फरियादियों के लिए फरिश्ता हो सकते है, परन्तु यह जानना भी जरुरी है कि कितने फरियादी जिलाधिकारी से संतुष्ट है—? क्योंकि 80 प्रतिशत मामला राजस्व से सम्बंधित होता है, जबकि राजस्व से सम्बंधित सभी दस्तावेज स्थानीय तहसील मे मौजूद होता है फिर भी फरियादी सम्बंधित अधिकारी के पास दौडते-दौडते थक जाता है, अन्तिम विकल्प आप श्रीमान के पास मामला पंहुचता है और आपके द्वारा फिर वही रिमाइंडर कर दिया जाता है जहां से हार थक कर आप तक पंहुचा था, फिर सम्बंधित अधिकारी के पास l
आपके के पास जाना और सम्बंधित अधिकारी के फिर भेज देना, फिर वही कहानी फरियादीयों के साथ शुरु होता है, न्याय के लिए दर-दर भटकता है l भटकना असहाय के लिए कितना कठिन होता है आप श्रीमान जी से बेहतर कौन जान सकता है l
विकास की दौर मे जिलाधिकारी कुशीनगर का ध्यान आकर्षित कराना चाहेंगे कि अगर मुख्यालय पडरौना कुशीनगर की बात करे तो अभी भी विकास के मामले मे अन्य जनपदों के अलावा कुशीनगर जनपद काफी पिछे छुट गया है l पडरौना रेलवे स्टेशन की स्थिति से एकबार रुबरु होना चाहिए, पडरौना पुरुष नेत्र चिकित्सालय एवं महिला हास्पिटल की स्थिति को जानना चाहिए साथ ही पडरौना में क्या नही है यह जानना आपके लिए जरुरी है –? बच्चों के लिए पार्क न होना, चिडियां घर बनाने की कोशिश करना, सामुहिक शौचालय न होना, यह भी जानना जरुरी है कि मानक के विपरीत जगह-जगह हास्पिटल खोलकर अस्वस्थ मरीजों के साथ जान से खेलना, विधालयों की मनमानी से अभिभावक परेशान इत्यादि समस्याओं के साथ नगर में हरियाली और रास्ता के साथ वृक्षारोपण, बदबूदार सडक, बिजली की समस्याओं से जुझ रहा है हर व्यक्ति l
