नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा ने बढ़ाई चिंता, कई शहरों में कर्फ्यू; तीन की मौत, दर्जनों घायल
काठमांडू! नेपाल के सुनसरी जिले से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा अब कई अन्य शहरों तक फैल गई है। पिछले चार दिनों से जारी हिंसक घटनाओं ने देश की कानून-व्यवस्था को गंभीर चुनौती दे दी है। विभिन्न स्थानों पर आगजनी, पथराव, तोड़फोड़ और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की घटनाओं के बाद प्रशासन को कई जिलों में कर्फ्यू लागू करना पड़ा है। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना को तैनात किया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों में प्रदर्शनकारी, स्थानीय नागरिक और सुरक्षाकर्मी शामिल बताए जा रहे हैं। कई स्थानों पर सरकारी संपत्ति, निजी प्रतिष्ठानों, दुकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया है।
जानकारी के अनुसार, हिंसा की शुरुआत सुनसरी जिले के देवानगंज क्षेत्र में हुई। स्थानीय लोगों का दावा है कि बोलबम यात्रा के दौरान हिंदू श्रद्धालुओं और मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों के बीच विवाद हुआ। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि मंदिर की सार्वजनिक भूमि पर मुहर्रम के अवसर पर लगाए गए झंडे को लेकर पहले से विवाद चल रहा था।
बताया गया कि बोलबम यात्रा की शुरुआत के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद पथराव और झड़पें शुरू हो गईं। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया।
संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है, जबकि कुछ इलाकों में हवाई निगरानी के जरिए हालात पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और घरों के भीतर रहने की अपील की है।
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौड़ेल ने सुनसरी और आसपास के इलाकों में बिगड़े हालात पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने नागरिकों से सामाजिक, धार्मिक और जातीय सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि नेपाल की पहचान आपसी भाईचारे और सहिष्णुता से रही है, जिसे हर हाल में बनाए रखना जरूरी है।
लगातार फैल रही हिंसा के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि शुरुआती चरण में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण हालात और बिगड़ गए।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हिंसा फैलाने वालों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने भी उच्चस्तरीय बैठकों के बाद शांति बनाए रखने और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
चार दिनों से जारी अशांति का असर आम लोगों के जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। कई शहरों में बाजार बंद हैं, सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुआ है और कई शैक्षणिक संस्थानों को एहतियातन बंद कर दिया गया है। व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
फिलहाल पूरे नेपाल की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हालात को कितनी जल्दी सामान्य कर पाती हैं। वहीं, विभिन्न घटनाओं और आरोपों के संबंध में कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
