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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के फैसले पर हाई कोर्ट की रोक पर बयान जारी किया है

“इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार ने ये कहकर रंग मे भंग कर दिया कि ‘कार्यकाल ख़त्म होने के बावजूद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का यूपी सरकार का फ़ैसला असंवैधानिक है’। जनता पूछ रही है कि ‘असंवैधानिक’ काम करने की सज़ा क्या होती है?’

अब यही ग्राम प्रधान भाजपाइयों को इसलिए गाँवों में घुसने नहीं देंगे क्योंकि भाजपा सरकार द्वारा उन्हें प्रशासक बनाने के आदेश ने, उनमें कुछ नये काम करने की उम्मीद जगाई थी, जिसका वादा वो जनता से कर चुके थे, अब जनता तो तकनीकी पक्ष समझती नहीं है कि क्या हुआ, वो तो यही मानेगी कि प्रधान जी ने अपना वादा पूरा नहीं किया और सारा फ़ंड-बजट-पैसा डबल इंजन के साथ मिल-बाँटकर खा गये। प्रधानों में इस बात का भी डर है कि कहीं ‘इन बीच के दिनों’ के ख़र्चे का ख़ामियाज़ा उनको अपनी जेब से न भरना पड़े। हो सकता है कल को ‘पैसा वापसी’ का आदेश भी आ जाए। जब कार्यकाल गलत साबित हो गया है, तो उस समय में खर्च हुआ पैसा भी तो क़ानूनी रूप से गलत माना जाएगा। भाजपा ने प्रधानों को बहुत बुरा फँसा दिया है”


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