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*असुरन चौराहे पर अतिक्रमण से जाम, ‘पिंजड़ा दुकान’ बना ट्रैफिक का सबसे बड़ा रोड़ा*

*रोड चौड़ीकरण के बाद भी नहीं हटी दुकान, तीन फीट सड़क घेरकर बढ़ा रहा खतरा*

ब्यूरो चीफ प्रदीप कुमार मौर्या की रिपोर्ट

गोरखपुर। शहर के व्यस्त असुरन चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और इसकी सबसे बड़ी वजह बना है कोने पर लगी एक ‘पिंजड़ा बेचने की दुकान’। विष्णु मंदिर की तरफ से असुरन चौक की ओर आने वाली सड़क पर यह दुकान न केवल अतिक्रमण कर रही है, बल्कि रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन चुकी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण के दौरान आसपास के कई खपरैल मकानों को तोड़ा गया, लेकिन चौराहे के कोने पर स्थित इस दुकान को किन कारणों से नहीं हटाया गया, यह आज तक स्पष्ट नहीं हो सका है। यही कारण है कि अब यह दुकान सड़क पर कब्जा जमाकर ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।

बताया जाता है कि दुकानदार रोजाना करीब तीन फीट तक सड़क पर अपना सामान फैलाकर बैठ जाता है। चौराहे जैसे संवेदनशील स्थान पर यह अतिक्रमण वाहनों की आवाजाही में गंभीर बाधा बनता है। विष्णु मंदिर की ओर से आने वाले वाहन जैसे ही असुरन चौराहे पर पहुंचते हैं, उन्हें मुड़ने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे मामले में ट्रैफिक पुलिस भी मूकदर्शक बनी हुई है। रोजाना जाम लगने के बावजूद न तो दुकानदार के खिलाफ कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही अतिक्रमण हटाने की कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध अतिक्रमण फल-फूल रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चौराहे पर थोड़ी सी भी रुकावट बड़े हादसे का कारण बन सकती है। भारी वाहनों और दोपहिया की भीड़ के बीच इस तरह का अतिक्रमण किसी दिन गंभीर दुर्घटना को जन्म दे सकता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी समझ से परे है।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल इस अतिक्रमण को हटाया जाए और चौराहे को पूरी तरह खाली कराया जाए, ताकि यातायात सुचारु रूप से चल सके। साथ ही, ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो असुरन चौराहा जाम और हादसों का स्थायी केंद्र बन सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कब तक नजरअंदाज करता है या फिर ठोस कदम उठाकर आमजन को राहत देता है।


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