*गोरखपुर में ज़ीरो टिलेज गेहूं मेगा अभियान का शुभारंभ, सांसद रवि किशन ने की पहल की सराहना*
गोरखपुर : क्लाइमेट स्मार्ट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत आईटीसी मिशन सुनहरा कल, उमंग सुनहरा कल सेवा समिति और कृषि विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ज़ीरो टिलेज गेहूं मेगा अभियान का आज गोरखपुर में भव्य शुभारंभ हुआ। इस महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की शुरुआत गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ल के कर-कमलों द्वारा की गई।
कार्यक्रम के दौरान माननीय सांसद ने ज़ीरो टिलेज तकनीक की विस्तृत जानकारी लेते हुए इसकी उपयोगिता को किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक खेती की लागत को काफी हद तक कम करेगी, साथ ही मिट्टी की सेहत सुधारने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि ज़ीरो टिलेज तकनीक समय की बचत के साथ-साथ पराली प्रबंधन (स्टबल मैनेजमेंट) को बढ़ावा देने में भी उपयोगी है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सांसद ने इस पहल को “कृषि में टिकाऊ बदलाव की दिशा में क्रांतिकारी कदम” बताते हुए कहा कि किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने उपस्थित किसानों से अपील की कि वे इस तकनीक को अपनाकर खेती को और अधिक लाभकारी व पर्यावरण-स्नेही बनाएं।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, आईटीसी मिशन सुनहरा कल के सदस्यों, उमंग संस्था के प्रतिनिधियों, क्षेत्रीय किसानों और ग्राम स्तर के विभिन्न हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने इस तकनीक को व्यवहार में लाने और अपने गांव-क्षेत्र में इसे बढ़ावा देने का संकल्प व्यक्त किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि ज़ीरो टिलेज तकनीक में खेत की जुताई न करके सीधा बीज बोया जाता है, जिससे न केवल समय और ईंधन की बचत होती है, बल्कि मिट्टी में नमी भी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। यह जलवायु परिवर्तन के समय में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहतकारी तकनीक है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों से अवगत कराना और उन्हें टिकाऊ व मुनाफ़ेदार खेती के लिए तैयार करना है। आयोजन स्थल पर किसानों को तकनीक के प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी दिखाए गए, जिन्हें देखकर किसान उत्साहित दिखाई दिए।
ज़ीरो टिलेज अभियान के माध्यम से गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में खेती में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि विकास की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
