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*रोहिन नदी हादसा: दूसरे दिन मिला पिहू का शव, दो मासूमों की मौत से गांव में कोहराम*

*लापरवाही, निगरानी की कमी और खतरनाक घाट—कब जागेगी जिम्मेदारी?*

न्यूज सबकी पसंद गोरखपुर से ब्यूरो चीफ प्रदीप कुमार मौर्या की रिपोर्ट

गोरखपुर। तिवारीपुर थाना क्षेत्र के रोहिन नदी में नहाने के दौरान डूबे दो मासूम बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। बुधवार सुबह एनडीआरएफ की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद 9 वर्षीय पिहू का शव बरामद कर लिया, जिसे पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। इससे पहले मंगलवार को 12 वर्षीय सर्वेश यादव की इलाज के दौरान मौत हो चुकी थी। दो मासूमों की असमय मौत से गांव में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जानकारी के अनुसार सर्वेश यादव (12) पुत्र सतीश यादव, निवासी मानीराम (थाना चिलुआताल), अपने ननिहाल तकिया कवलदह पथरकट टोला आया हुआ था। वह अपने मामा विक्की यादव के घर ठहरा था। मंगलवार को करीब साढ़े ग्यारह बजे वह अपनी ममेरी बहन पिहू (9) के साथ अन्य बच्चो के साथ जो भेंस को लेकर जा रहे थे रोहिन नदी के किनारे पहुंच गए। वहां पहले से मौजूद अन्य बच्चों के साथ दोनों नदी में नहाने उतर गए और अचानक गहराई में चले जाने से डूबने लगे।
अन्य बच्चों के शोर मचाने पर गांव में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर पहुंचे लोगों को नदी किनारे चप्पलें पड़ी मिलीं, जिससे अनहोनी की आशंका और गहरा गई। सूचना पर पहुंची एनडीआरएफ टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाया। सर्वेश को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। पिहू की तलाश रातभर चलती रही और अंततः बुधवार सुबह उसका शव बरामद हुआ।
दोनों बच्चे मासूम उम्र में पढ़ाई कर रहे थे—सर्वेश कक्षा चार और पिहू कक्षा दो की छात्रा थी। उनके सपनों के साथ-साथ दो परिवारों की खुशियां भी इस हादसे में डूब गईं।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों के अनुसार अक्सर छोटे-छोटे बच्चे भैंस चराने या खेलने के दौरान नदी किनारे पहुंच जाते हैं, जहां पर्याप्त निगरानी नहीं होती। रोहिन नदी में कई स्थानों पर अचानक गहराई और तेज ढाल है, जो जानलेवा साबित होती है।
हालांकि पुलिस और प्रशासन द्वारा समय-समय पर नदी, तालाब और अन्य जलस्रोतों के आसपास जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद लापरवाही और सतर्कता की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
स्थानीय स्तर पर अब यह मांग भी उठने लगी है कि छोटे बच्चों को अकेले भैंस चराने या नदी किनारे भेजने से बचा जाए। अभिभावक स्वयं निगरानी रखें या साथ जाएं, ताकि इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा के ठोस इंतजामों की कमी साफ नजर आती है। न तो खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड हैं और न ही किसी तरह की घेराबंदी, जिससे ऐसे हादसे रोके जा सकें। पहले भी इस नदी में घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सबक लेने की पहल न के बराबर दिखती है।
घटना की सूचना मिलते ही महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, जिलाधिकारी दीपक मीणा, एसएसपी डॉ. कोस्तुभ एडीएम वित्त जय प्रकाश एसडीएम सदर दीपक गुप्ता समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए हर संभव मदद का आश्वासन दिया है और सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाने की बात कही है।
फिलहाल गांव में मातम पसरा हुआ है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही सवाल—आखिर ऐसी घटनाएं कब रुकेंगी?


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